Baal Jagat

ऋषि अगस्त्य

प्राचीनकाल में अगस्त्य बहुत महान और समर्थ ऋषि हुए हैं। उत्तर भारत से दक्षिण भारत की ओर जाने वाले आर्य परम्परा के ये प्रथम ऋषि थेउत्तर से दक्षिण की सहज यात्रा के लिए विन्ध्यपर्वत रास्ता रोके खड़ा था। महर्षि अगस्त्य के सामने जब यह समस्या आई तो उन्होंने अपने तपोबल से विन्ध्यपर्वत को नीचे झुकने का आदेश देते हुए कहा, “अभी मुझे दक्षिण की तरफ जाने का रास्ता दे दो और जब तक मैं न लौटूं तब तक उसी अवस्था में मेरे लौटने की प्रतीक्षा करना ।” ऋषि का आदेश मानकर विन्थ्यपर्वत नीचे झुक गया अगस्त्य सहज भाव से ही उसे लांघकर दूसरी ओर चले गए

अगस्त्य गए तो फिर लौटे ही नहीं, दक्षिण में ही बस गए विन्ध्याचल पर्वत उसी प्रकार झुका खड़ा रहा और इस प्रकार उत्तर दक्षिण आवागमन का मार्ग प्रशस्त हो गया दक्षिण में उन्होंने लोपामुद्रा नामक राजकन्या से विवाह किया और उसके साथ सुखपूर्वक रहकर तपस्वी जीवन बिताते रहे

उस समय दक्षिण में इल्वल और वातापि नाम के दो मायावी राक्षस रहते थे। दिखाने के लिए वे बड़े ब्राह्मण-भक्त तथा अतिथि-सेवी थेवे नित्य किसी न किसी ब्राह्मण को भोजन के लिए अपने यहां बुलाते । वातापि मेष (मेढ़ा) का रूप बना लेता भोजन के रूप में उसी मेष का मांस परोसा जाता, जो खाते वक्त पता ही न लगता था कि यह मांसाहार है । ब्राह्मण जब खाना खा चुकता तो इल्वल पुकारता, “अरे वातापि! अब बाहर आ जाओ।" इतना सुनते ही मायावी वातापि ब्राह्मण को पेट फाड़कर बाहर आ जाता इस प्रकार न जाने कितने अतिथि ब्राह्मणों को मारकर वे मायावी राक्षस अपना मनोरंजन कर चुके थे।

एक बार उन्होंने अगस्त्य को भी भोजन के लिए आमन्त्रित कर दियाअगस्त्य उन दुष्टों की चाल के बारे में जानते थे, फिर भी उन्होंने भोजन का आमन्त्रण सहर्ष स्वीकार कर लियावे भोजन करने से पहले उन मायावी राक्षसों के आवास पर पहुंच गए। इल्वल ने उसी प्रकार वातापि को मेष बनाकर विधिवत भोजन बनाया और अगस्त्य के सामने परोस दिया अगस्त्य वह खाना खा चुके तो उन्होंने इल्वल से कहा, “इल्वल! अभी मेरा पेट भरा नहीं है, मेरे लिए और खाना लाओ।"

इल्वल को आश्चर्य हुआ कि अगस्त्य इतना सारा खाना खा गए फिर भी भूखे हैं वह थोड़ा चकित होकर बोला, “ऋषिवर! थोड़ा ठहरिए मैं अपने भाई वातापि को बुलाता हूं। उसकी मदद से और खाना बनवाता हूं।" यह कहकर उसने आवाज लगाई, “वातापि-वातापि! बाहर आ जाओ। अगस्त्य ऋषि का अभी पेट भरा नहीं है।"

इल्वल पुकारता रहा, पर वातापि का कहीं पता नहीं चला। वह बार-बार पुकारकर परेशान होता रहा। अगस्त्य उसकी परेशान हालत को देखकर मस्कराते रहे। जब वातापि बाहर नहीं आया तो अगस्त्य ने कहा, “इल्वल! अब और भोजन नहीं मिलेगा क्या? क्या मैं आधा पेट भोजन करके ही उठ जाऊं?"

इल्वल को बहुत आश्चर्य हो रहा था कि उसका भाई वातापि अभी तक अगस्त्य का पेट फाड़कर बाहर क्यों नहीं निकला! वह बार-बार अगस्त्य की ओर देख रहा थाउसकी परेशानी देखकर अगस्त्य ने हंसकर कहा, "इल्वल! तेरा भाई वातापि तो मेरी जठराग्नि में हमेशा के लिए भस्म हो गया । अब वह बाहर कहां से आएगा अब तो मेरी कोप दृष्टि से तेरा भस्म होना बाकी है।"

इतना सुनते ही इल्वल भागने को हुआ, लेकिन जब अगस्त्य ने अपनी तदाग्नि की कोप दृष्टि से उसकी ओर देखा तो वह वहीं का वहीं भस्म हो गया । इन दोनों के मारे जाने की खबर जैसे ही अन्य असुरों को मिली, वे सब बुरी तरह भयभीत हो गए और ऋषि के कोप से बचने के लिए जल स्तम्भन मन्त्र-शक्ति के बल पर समुद्र में जाकर छिप गए।

उसी समय देवलोक में देवराज इन्द्र ने जब वृत्रासुर का वध कर दिया तो अपने राजा तथा सेनापति के मारे जाने पर अन्य समस्त असुर सैनिक भागकर भूमण्डल में आए और जल स्तम्भन मन्त्र-शक्ति के बल पर वे भी समुद्र में छिप गएइस प्रकार इल्वल और वृत्रासुर के बचे हुए साथी असुर दिन में तो समुद्र में छिपे रहते और रात्रि में समुद्र से निकलकर देवों तथा ऋषियों पर आक्रमण करते तथा लूटपाट, मारकाट मचाकर उनकी सुख-शान्ति भंग करते । अपने राजा के मरने के बाद उनको किसी प्रकार का भय नहीं रह गया था, इससे देवता बड़े परेशान हुए।

सारे देवगण मिलकर अगस्त्य के पास गए और उन्हें राक्षसों के उत्पात के विषय में बताया कि किस प्रकार ये राक्षस यज्ञ आदि धार्मिक कार्य नहीं करने देते उन्होंने ऋषि से प्रार्थना की, “यदि आप समुद्र को सोख लें तो हम राक्षसों का संहार कर देवों और ऋषियों को निर्भय कर देंगे।"

महर्षि अगस्त्य ने जब देवताओं की विनती सुनी तो सबके कल्याण के लिए उन्होंने अपनी आग्नेयी शक्ति का आह्वान करके सारे समुद्र जल को सोख लियासमद्र के सूख जाने पर राक्षस घबराए कि अब कहां जाएं? लेकिन वे कोई उपाय सोचें, इसके पहले ही देवों ने उन पर प्रहार कर दियाकुछ राक्षस देवताओं ने समाप्त किए तो कुछ महर्षि की आग्नेयी दृष्टि से जलकर भस्म हो गए । इस प्रकार अगस्त्य ने समुद्र को सोखकर भूमण्डल को राक्षसों के भय से मुक्त कर दिया

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