Swasthaya Rakshak



भोजन के पाचन एवं शरीर को आवश्यक पोषण पहुँचाने में लिवर का महत्व

कोई भी भोज्य सामग्री ग्रहण करते ही पाचन संस्थान उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित करने लगता है। इसके बाद ये आहार रक्त के द्वारा लिवर तक पहुँचाता है । लिवर भोजन में उपस्थित सभी पोषक तत्वों को जैसे विटामिन्स, मिनरल्स, एंटी-ऑक्सीडेंट्स इत्यादि को अलग - अलग कर के शरीर की आवश्यकतानुसार इसे अलग - अलग अंगो तक पहुँचाता है एवं कुछ पोषक तत्वों को स्टोर कर लेता है।

* लिवर चयापचय कि प्रक्रिया में वसा को तोड़ने के साथ ही उसे सुपाच्य बनाने में सहायक होता है। । प्रोटीन पर कार्य करके उसको शरीर के लिए उपयोगी बनाना । । काबोर्हाइड्रेट और कुछ एमिनो - एसिड को ग्लूकोज में परिवर्तित कर शरीर को ऊर्जा देना । पित्त का उत्पादन करना लिवर का अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। यह पित्ताशय थैली में संग्रहित रहता है एवं वसा एवं विटामिन के अवशोषण में आवश्यक है। पोषक तत्वों का संग्रहण लिवर में होता है जैसे आयरन, विटामिन्स व मिनरल्स, शुगर(काबोर्हाइड्रेट, ग्लुकोज एवं फैट) लिवर ऊर्जा बनाये रखता है। यही संग्रहित ऊर्जा आपको व्रत या कम खाने की स्थिति में लिवर द्वारा आपको आवश्यकतानुसार प्राप्त हो जाती है।

विटामिन :

कि मदद से लिवर उन प्रोटीन्स का उत्पादन करता है जो रक्त का थक्का बनने में सहायक हैं। शरीर से टॉक्सिन्स (विषैले तत्व) लिवर द्वारा अलग किये जाते हैं। बिलुरुबिन एवं अमोनिया भी इसमें शामिल हैं। शरीर में मौजूद सारा रक्त लिवर से होकर गुजरता है ताकि रक्त में उपस्थित विषैले तत्व या टॉक्सिन्स को अलग करके शरीर से बाहर निकाला जा सके। यदि ये टॉक्सिन्स शरीर में रह जाते हैं तो सेल्स को डैमेज करते हैं। liver Fatty liver कहीं न कहीं मस्तिष्क का सुचारु रूप से कार्य करना भी लिवर पर निर्भर है। लिवर द्वारा प्लाज्मा ग्लूकोज एवं अमोनिया के स्तर को निर्धारित किया जाता है । यदि यह अनियंत्रित हो जाए तो व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है । यदि लिवर की कार्य प्रणाली में कोई भी गड़बड़ी होती है तो अनेकों लिवर संबंधी रोग हो सकते हैं जैसे :

फैटी लिवर :

जब लिवर में फैट या वसा अधिक जमा हो जाता है तो लिवर फैटी हो जाता है ।

लिवर कैंसर:

लिवर कोशिकाओं में असामान्य वृधि से लिवर कैंसर हो जाता है ।

लिवर सिरोसिस :

इस रोग में लिवर धीरे - धीरे सिकुड़ने लगता है और लचीलापन खोकर कठोर हो जाता है । * ऑटोइम्यून सिस्टम की असामान्यता * ऑटोइम्यून सिस्टम की असामान्यता से लिवर संबंधी निम्न बीमारियाँ हो सकती है। ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस , प्रायमरी बाइलेरी सिरोसिस आदि हमारी सम्पूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए लिवर को स्वस्थ बनाए रखना अत्यंत ही आवश्यक है। यदि लिवर अपनी सम्पूर्ण गुणवत्ता से कार्य नहीं कर रहा है तो शरीर इसके संकेत देने लगता है जैसे -
1. गैस व ब्लोटिंग की समस्या
2. कब्ज
3. एसिड रिफ्लक्स
4. मूत्र का रंग गहरा होना 5. त्वचा व आँखों का रंग पीला होना
5. त्वचा व आँखों का रंग पीला होना 6. भूख न या कम लगना
6. भूख न या कम लगना
7. सारे समय थकावट लगना आदि इसके अतिरिक्त उच्च रक्तचाप, बहुत आधक थकावट लगना, चिता व रक्तचाप, बहुत अधिक थकावट लगना, चिंता व अवसाद आदि भी हो सकते हैं।
_ लिवर शरीर का सर्वाधिक काम करने वाला अंग है । यह पित्त का निर्माण कर फैट को पाचन योग्य बनाता है। हार्मोन्स को संतुलित रखना, विटामिन्स, मिनरल्स एवं आयरन को संग्रहित करना एवं एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य 'डिटॉक्स' करता है। शरीर मुख्यतः टॉक्सिन्स से छुटकारा लिवर की सहायता से पाता है । यह निरंतर रक्त की डिटॉक्स की प्रक्रिया में लगा रहता है। किसी भी व्यक्ति का स्वस्थ होना इस पर निर्भर करता है कि शरीर टॉक्सिन्स को अधिक से अधिक शरीर से बाहर निकलने में सक्षम है। लिवर यह कार्य निरंतर करता रहता है परन्तु ऐसे कई अवांछनीय तत्व होते है जो लिवर - स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। उनमें से कई विषैले तत्व हमारे शरीर में भोजन द्वारा पहुँचते हैं जैसे प्रोसेस्ड एवं रिफाइंड भोज्य पदार्थ , कृत्रिम रंग इली हुई खाद्य सामग्री, पेस्टीसाइड, जंक फड इत्यादि, कछ टॉक्सिन्स वातावरण में उपस्थित होते हैं एवं शरीर में पहुँच जाते हैं। इसके अतिरिक्त पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स जैसे साबुन टूथपेस्ट एवं अन्य बॉडी केयर प्रोडक्ट्स में हानिकारक केमिकल्स रहते हैं जो शरीर में भारी मात्रा में पहुँच जाते हैं । इन सब कारणों से अधिकतर लोगों के लिए 'डिटॉक्स' एक अनिवर्य प्रक्रिया हो जाती हैं। 'लिवर डिटॉक्स' इसी प्रक्रिया का अंग हैं। लिवर डिटॉक्स द्वारा लिवर की कार्य क्षमता फिर से बढ़ाई या सामान्य की जा सकती हैं एवं एवं लिवर के पूर्ण क्षमता से कार्य न करने पर शरीर जो संकेत देने लगता हैं वे भी धीरे-धीरे सामान्य हो सकते हैं। मानव शरीर में लिवर ही एकमात्र ऐसा ऑर्गन है जो फिर से रीजनरेट हो सकता है। 'लिवर डिटॉक्स' के लिए कुछ तत्वों काउपयोग करने कि आवश्यकता होगी हम इस महत्वपूर्ण पहलू पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे

'लिवर डिटॉक्स' में सहायक तत्व 1 हल्दी -1 हल्दी :

यह लिवर के लिए एक बहुत ही लाभदायक तत्व है। हल्दी टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालने में आवश्यक एंजाइमों के लिए सहायक होती है। हल्दी में वे एंटी - ऑक्सीडेंट्स पाये जाते हैं जो लिवर - सेल्स की मरम्मत करते हैं। यह पित्त उत्पादन में वृधि कर लिवर से हेवी मेटल डिटॉक्स में भी सहायक होती हैयह हेल्दी लिवर टिशू को सपोर्ट करती है एवं लिवर मेटाबॉलिज्म में सहायक होती है। लिवर स्वास्थ्य के अतिरिक्त भी हल्दी सम्पूर्ण स्वास्थ्य रक्षा के लिए भी अत्यंत ही उपयोगी होती है।

2- मिल्क थिसल :

मिल्क थिसल का मुख्य तत्व 'सिलीमरीन' होता है जो की एक एंटी - ऑक्सीडेंट का कार्य करके फ्री रैडिकल्स के उत्पाद में कमी लाता है, जो कि डिटॉक्स प्रक्रिया में प्रभावी होता है। मिल्क थिसल का उपयोग लिवर संबंधी समस्याओं के प्राकृतिक निदान के लिए भी किया जाता है। मिल्क थिसल को डिटॉक्स करने वाली हर्स का राजा भी कहा जाता है क्योंकि यह लिवर में जमा हेवी मेटल, उपभोग करी हुई दवाएँ, वातावरण जनित प्रदूषण एवं अल्कोहल की भी सफाई करने में सक्षम होता हैसाथ ही साथ कीमो एवं रेडिएशन के द्वारा हुए लिवर पर बुरे प्रभाव को कम करता है। 'सिलिमरीन' लिवर की सेल - वाल को भी मजबूती प्रदान करता है। मिल्क थिसल को सप्लीमेंट के रूप में भी लिया जा सकता है।

3 इन्डलाइन :

इस पौधे कि जड़ को 'लिवर टॉनिक' भी कहते हैं। यह विटामिन्स, मिनरल्स एवं फाइबर से भरपूर होती है। यह स्वाभविक रूप से मूत्रवर्धक होती है जिसके कारण लिवर से शीघ्रता से टॉक्सिन्स बाहर निकलने में सहायता होती है। इसके लाभ यहीं तक सीमित नहीं है वरन यह प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाने, ब्लड शुगर लेवल संतुलित करने एवं पाचन से संबंधित समस्याओं के लिए भी उपयोगी है।

4 आटिचोक :

इसे भी अनेकों लिवर जनित रोगों में उपयोग किया जाता है जैसे अपच, फैटी लिवर, अल्कोहलिक लिवर, सिरोसिस आदि। आर्टिचोक में पाये जाने वाले शक्तिशाली बायोफ्लेवोनायड्स इसको लिवर डिटॉक्स का बहुत अच्छा माध्यम बनाते हैं । ये लिवर की सफाई कर- के उसकी सुरक्षा करते हैं और जमे हुए टॉक्सिन्स बाहर निकालते हैं।

5 N एसिटिलसिस्टीन :

ये एमिनो एसिड L - सिस्टीन से प्राप्त होते हैंN एसिटिलसिस्टीन के अनेकों चिकित्सकीय उपयोग हैं । यह लिवर फेलियर के लिये दीगई दवा Tylenol के ओवरडोज का एक मात्र एंटीडोज है। कार्बन मोनोऑक्साइड पाइजनिंग का प्रतिकार भी इसी से किया जाता है। यह ग्लूटेथिऑन जो कि अत्यंत ही शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट है का अग्रगामी है ।

6 कालमेघ :

इसका उपयोग प्राचीनकाल से आयुर्वेदिक दवाइयों में किया जा रहा है। कालमेघ प्रतिरोधी तंत्र को मजबूत तो बनाता है ही साथ ही कमजोर भूख को बढ़ाता है एवं पाचन क्रिया को सुचारु करता है। लिवर को डिटॉक्स करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्लोरोफिल :

प्रकृति द्वारा प्रदत्त एक अनमोल उपहार है । यह मख्य रूप से पेड पौधों में पाये जाने वाले हरे रंग के लिये उत्तरदायी होता है । रंग के साथ - साथ यह, अनेकों गुणों की खान होता है । क्लोरोफिल की संरचना मानव रक्त की संरचना से बहुत मिलती- जुलती होती है हीमोग्लोबिन जो की लाल रक्त कण है ऑक्सीजन का वाहन होता है, क्लोरोफिल से अत्यधिक समानता रखता हैसिर्फ एक अंतर रहता है हीमोग्लोबिन का मुख्य एटम आयरन होता है और क्लोरोफिल कामुख्य एटम मैग्नेशियम होता है इसीलिए क्लोरोफिल "पेड़ पौधों का रक्त " कहलता है। मानव शरीर के लिए क्लोरोफिल अत्यधिक लाभदायक है। यह मेथी, पालक, धनिया, स्पिरिलुना अल्फा - अल्फा, व्हीटग्रास ( गेहूँ के ज्वारे ) से प्राप्त होता है। सभी पौधों से प्राप्त क्लोरोफिल कि गुणवत्ता में अंतर होता हैसर्वोत्तम क्लोरोफिल व्हीटग्रास से प्राप्त होता है । क्लोरोफिल बिना किसी विपरीत प्रभाव के मानव शरीर को स्वास्थ्य और जीवन ऊर्जा प्रदान करते है व्हीटग्रास जूस के सेवन से हीमोग्लोबिन के स्तर में चमत्कारिक सुधार होता है। किडनी एवं लिवर सिस्टम में सुधार होता है। इस रस में शरीर को स्वस्थ रखने के साथ - साथ उसमें शोधन करने की भी अद्भुत क्षमता है। आज के प्रदूषित वातावरण ने शरीर को अनेकों विषैले तत्वों जैसे हेवी मेटल, पेस्टिसाइड्स आदि से बुरी तरह प्रभावित किया है व्हीटग्रास जूस डिटॉक्स का सर्वोत्तम साधन है।

8 पोटेशियम से भरपूर खाद्य तत्व :

लिवर क्लीन्सिंग में बहुत सहायक होते हैं जैसे शकरकंद , चुकंदर , पालक, बीन्स, केला इत्यादि। किन्तु इन्हें लेते समय एक सावधानी रखनी होगी यदि किडनी में उच्च पोटेशियम स्तर है तो इन खाद्य तत्वों को सामन्य मात्रा में लेना चाहिए । लिवर स्वास्थ्य एक स्वस्थ शरीर के लिए अत्यंत ही आवश्यक है। कुछ चीजों का पालन करके हम लिवर को डैमेज होने से बचा सकते है। प्रोसेस्ड एवं रिफाइंड फूड, ट्रांस फैट युक्त खाद्य पदार्थ लिवर को बहुत ही नुकसान पहुंचते है। दिनोंदिन भोजन में हमें टॉक्सिन फ्री, स्वास्थ्य वर्धक सामग्री को शामिल करना चाहिये, अल्कोहल का यदि सेवन करना ही हैतो संयमित मात्रा में वजन को नियंत्रण में रखा जाए पर्याप्त नींद लें। व्यायाम, ध्यान एवं योग को जीवन का हिस्सा बनाएँ एवं समय पर डिटॉक्स कर एक स्वस्थ जीवन का आनंद उठाएँ।

महिमा वर्मा